#HindiDiwas "हिंदी दिवस"
"हिंदी दिवस"
बुझी -बुझी, कुछ उखड़ी -उखड़ी कल रस्ते में मिल गई हिंदी।
मैंने पूछा -अस्त -व्यस्त क्यों, कहां गई माथे की बिंदी ?
"हिंदी"
किसको है परवाह मेरी, क्यों झूठा प्यार दिखाते हो?
सभी मंच पर खड़े -खड़े तुमअंग्रेजी बतलाते हो।
यही पे जन्मी , पली-बढ़ी मैं, पर मैंने क्या पाया है??
बच्चे हो या युवा सभी पर, अंग्रेजी का साया है ।
देसी भाषा, वर्ण विदेशी, यह एक नया दिखावा है।
अंग्रेजी से हिंदी लिखते, कैसा नया छलावा है?
मेरे बच्चे होकर तुम अब, मुझसे ही कतराते हो!
मुझ को जिंदा रखने खातिर, हिंदी दिवस मनाते हो।
मैं बोली- ऐसा भी नहीं मां, कुछ हम पर भी विश्वास करो।
पुनः लौट आएगा स्वर्णिम," हिंदी युग" यह-आस करो ।
भारत में अनेक भाषाएं, लेकिन तुम सर्वोत्तम हो ।
सुंदर लिपि है, सुंदर लेखन, आकर्षित अति उत्तम हो।
गूगल, व्हाट्सएप ,फेसबुक, टि्वटर,तुम पर इंस्टाग्राम है।
यू एन में भी गूंज रहा अब तेरा गौरव का गान है।
मातृ -भाषा तुम शर्म नहीं हो, भारत का अभिमान हो।
हिंद देश की हिंदी भाषा, भारत की पहचान हो।
….रश्मि.. .
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें