Meri beti
माँ की बेटी एक माँ के लिए बेटी ईश्वर का बहुत बड़ा वरदान है। माँ के लिए अपनी बेटी को बड़ा होते देखना एक सुखद अनुभव होता है। एक नन्ही कली कैसे बड़ी होकर सुन्दर सी परी बन जाती है ,माँ की नजरों का ये सफर ही इस कविता में झलकता है। आँचल में तुम हो, पल- पल में तुम हो, धड़कन में तुम हो, सरगम में तुम हो, खिलती कली सी तुम मुस्कुराती, चंचल हवा के संग खिलखिलाती। पानी की थिरकन, कंगन की खन- खन, नाजुक सा ये तन, कोमल से ये मन, नन्हे- कदम से तुम चल पड़ी हो , इठलाती- बलखाती तुम चुलबुली हो। खुशबु सी महको, हर घर में चहको , तुम ख़्वाब सबके, पलकों में भरलो, साजों की सरगम से तुम रची हो, घुँघरू की झनकार में तुम बसी हो। चन्दा सितारों की डोली बनायी, दुल्हन बनी मेरी बेटी परायी। ...