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फ़रवरी, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

EK SABAK

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कभी कभी जीवन का सबक सीखने के लिए एक छोटा सा पल भी काफी होता है।  जीवन ,रेत की तरह हाथ से फिसलता चला जाता है,  और हम बस अपने भविष्य की कल्पनाओं में ही जुटे रहते है। हमें   आज,अभी ,और इसी  पल में ही  जीना सीखना चाहिये।  घर की मुंडेर पर जमीं हुई, मैं सोच रही थी बैठी- बैठी , नीचे हा- हा कार मचा क्यों ,मैं अर्थी पर क्यों हूँ लेटी।  नीचे जाकर खूब जगाया,  खुद ने खुद को खूब उठाया।  तभी पधारे यम अंकल जी, करने मुझसे भेंट , चलो वत्स ,अब बहुत हो गया ,यू आर गेटिंग लेट। मैं झल्लायी ,चिल्लाई बोली ये कैसा है इन्साफ ? वार्निंग तो देनी थी पहले ,कैसे कर दिया मुझको साफ़ ?  अब तक मैंने किया  ही क्या है ? जी भर के कुछ जिया ही क्या है ? अच्छे पल के इन्तजार में ,तकती रास्ता आँख बिछाये , मंजिल का तो पता नहीं, पर तुम क्यूँ बीच में लेने आये ?  यम अंकल जी हंस कर बोले, रोज मैं सुनता यही कहानी , जीते जी तुम समझ ना पाए ,मर कर सब बनते हो ज्ञानी।  सदियों से तुम पढ़ते आये लिखते ,रटते,जपते,आये, हर प...

Hamara Desh Hamari Jimmedaari part 2

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( वृद्धआश्रम में अपने माता- पिता को लाईये ,जल्द रजिस्ट्रेशन करिये। सभी सुविधाओं को पहले रिजर्व करिये। आप स्वयं का भी नाम अभी बुक कर  सकते है बाद में सीट नहीं मिलेंगी। पहले आईये- पहले      पाईये, जल्दी कीजिये- वृद्धाश्रम में बहुत भीड़ चल रही है।ऑफर सिमित समय तक। )                                                             आज माँ, मॉर्निंग वाक से आयी तो बहुत दुखी थी ,चाय भी टेबल पर ही छोड़ कर  सीधे कमरे में चली गयी। मैं हैरान थी चाय लेकर उनके कमरे में गयी तो देखा- वो रो रही थी।        मैं बोली- क्या हुआ माँ किसी ने कुछ कहा, या कोई चोट तो नहीं लगी।  माँ बोली- बेटा चोट तो दिल में लगी है, घर से बेघर होने की चोट ,तिनका- तिनका जोड़ कर खून-पसीने से एक घर बनता है,जहाँ हम अपना बुढ़ापा अपने बच्चों के साथ आराम से निकालेंगे, ये सोच कर पूरी जिंदगी मेहनत करते है, और अंत में वही परिवार कैसे अपने ...

Hamara Desh Hamari Jimmedari part 1

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मैं शाम को shopping करके घर लौट रही थी। गली में घुसते ही एक दीवार पर कुछ लोग paint  से लिख रहे थे -बेटी बचाओ। मेरी नजरें तो वही अटक गयी पर कदम घर की तरफ बढ़ रहे थे। वो दीवारे, गली  ,नुक्कड़  सभी मेरी आखो के सामने घूम रहे थे जहां स्लोगन लिखा था- बेटी बचाओ। अंदर से जोर- जोर से आवाज आने लगी - ⧭                            सरफिरे मनचलों से -बेटी बचाओ।                               गुंडे मवालियों से -बेटी बचाओ।                           घूरती हुई नजरों से -बेटी बचाओ।                            दहेज़ के लोभियों से -बेटी बचाओ।                              भ्रूणहत्या से -बेटी बचाओ। ये शोर इतना तेज था की मैं घर की DO...