Hamara Desh Hamari Jimmedaari part 2


(वृद्धआश्रम में अपने माता- पिता को लाईये ,जल्द रजिस्ट्रेशन करिये। सभी सुविधाओं को पहले रिजर्व करिये। आप स्वयं का भी नाम अभी बुक कर  सकते है बाद में सीट नहीं मिलेंगी। पहले आईये- पहले      पाईये, जल्दी कीजिये- वृद्धाश्रम में बहुत भीड़ चल रही है।ऑफर सिमित समय तक। )                                                            
आज माँ, मॉर्निंग वाक से आयी तो बहुत दुखी थी ,चाय भी टेबल पर ही छोड़ कर  सीधे कमरे में चली गयी। मैं हैरान थी चाय लेकर उनके कमरे में गयी तो देखा- वो रो रही थी। 
      मैं बोली- क्या हुआ माँ किसी ने कुछ कहा, या कोई चोट तो नहीं लगी। 
माँ बोली- बेटा चोट तो दिल में लगी है, घर से बेघर होने की चोट ,तिनका- तिनका जोड़ कर खून-पसीने से एक घर बनता है,जहाँ हम अपना बुढ़ापा अपने बच्चों के साथ आराम से निकालेंगे, ये सोच कर पूरी जिंदगी मेहनत करते है, और अंत में वही परिवार कैसे अपने बुजुर्गो को घर से बाहर कर देता है........ 
            ये कहते- कहते वो जोर-जोर से रोने लगी। 
 मैंने भी रोते हुए  पुछा -माँ आप किसकी बात कर रहे हो आपको----------
             माँ बीच में ही बोली -मैं मेरी नहीं मेरी सहेली राधा की बात कर रही हूँ। कुछ  बच्चे अपने बुजुर्गो को बस एक सामान समझते  है, अगर घर में एडजस्ट न हो तो वृद्धाश्रम छोड़ आते है ,ये तो आजकल ट्रेंड हो गया है..बहु और सास में पटती नहीं है,अब पति भी नहीं रहे , तो बस राधा का बेटा भी उसे कल वृद्धाश्रम ही छोड़ रहा है। 
अरे माँ, तो आप क्या कुछ नहीं करेंगी?  हमें उनकी बहु रीना और उनके बेटे को रोकना चाहिए। उन्हें समझाना चाहिए। 
माँ ने कहा- सही बात है समझाना तो पडेगा पर अलग तरीके से ,कहकर माँ ने एक प्लान बनाया। आज कुछ तो होने ही वाला था। यही रीना का पीहर भी था,माँ ने राधा आंटी से  रीना के भाई रोहित के नम्बर और घर का पता लिया और उनके घर के पास पहुँच गए। 
    फिर मैंने उनके मोबाईल पर एक मैसेज भेजा -(वृद्धाश्रम में अपने माता पिता को लाईये ,जल्द रजिस्ट्रेशन करिये। सभी सुविधाओँ को पहले रिजर्व करिये।आप स्वयं का भी नाम बुक कर सकते है बाद में सीट नहीं मिलेगी। पहले आईये -पहले पाईये जल्दी आईये वृद्धाश्रम  में बहुत भीड़  चल रही है ऑफर बहुत सिमित समय तक है।)

तभी रोहित का कॉल आया -कोन है आप ?ये कैसा वाहियात मजाक है,?कोई क्यों अपने माँ-बाप को अपने ही परिवार से दूर करेगा?उन्हें अपने ही घर से बेदखल करेगा। वृद्धाश्रम उनके लिए है जिनके पास कोई घर नहीं हो, परिवार नहीं हो। 

मैंने उनको रोकते हुए कहा -ये मुझे नहीं mr . रोहित आपको अपनी बहन को समझाना चाहिए।हम उनके घर के दरवाजे पर थे।  मैंने अपना परिचय दिया और माँ से बात करायी वे माँ की बात को समझ गए और हमारे कहने पर ही उन्होंने वो मेसेज रीना को भेजा ,साथ  में लिखा था मैं  कल माँ -पापा को छोड़ कर आ रहा हूँ। 

रीना का तुरंत कॉल आया-मैं  घर आ रही हूँ आप मेरे जीते जी ऐसा नहीं कर सकते। 

हम सब उसका ही इन्तजार कर रहे थे खास तोर पर माँ। डोर बेल बजी,दरवाजा खुला, मैं और माँ एक कोने में बैठे थे -रीना के चहरे पर माँ पिता का दर्द साफ़ दिख रहा था। रीना जोर से चिल्लाई -भाई आप ऐसा नहीं कर सकते मेरे होते हुए आप उन्हें किसी वृद्धाश्रम में नहीं भेजेंगे।

माँ से रहा नहीं गया वो बोल पड़ी -क्यों, तुम क्या कर रही हो तुम भी तो अपनी सास को वही भेज रही हो, मानो तो वो भी तुम्हारी माँ ही है, अपने पर चोट लगी तो दर्द हुआ । जो दर्द अभी एक बेटी को हो रहा है वो एक बहु को क्यों नहीं ?क्यों एक बहु ने अपने पति को यही बात नहीं बोली ?की मेरे होते हुए आप माँ जी को कही नहीं ले जा सकते। क्यों एक बेटा शादी के बाद ही अपने माँ बाप को वृद्धाश्रम छोड़ने पर मजबूर हो जाता है ?

माँ के इतने सारे सवालो का रीना के पास कोई जवाब नहीं था। आज रीना शर्मिंदा थी उसकी आँखे शर्म से झुकी हुई थी लब्ज सिल चुके थे। वो माँ को देखते ही समझ गयी थी की ये सब उसे ही समझने के लिए किया गया है।उसकी आँखों से उसका पछतावा निकल रहा था। उसे उसकी गलती का अहसास हो गया था। अब जो बिगाड़ा था उसे सुधारने की  उसकी ही जिम्मेदारी थी। 

  दुसरे दिन माँ गार्डन में मजे से अपनी सहेली से गप्पे लड़ा के आ रही थी। माँ ने राधा आंटी को कुछ नहीं बताया, उनको तो बस अपनी सहेली को रोकना था। हाँ, राधा आंटी के लिए आज भी ये सस्पेन्स है की उनकी बहु- बेटी कैसे बन गयी ?

ये हमारी जिम्मेदारी है की हम अपनी बेटियो को भी ये संस्कार दे, की वे अपने ससुराल को अपना पीहर बना सके। अपने सास- ससुर को अपने माता- पिता का सम्मान दे सके, उन्हें बेटी बनकर  प्यार दे। ताकि हमारे समाज में हर रोज बनते वृद्धाश्रम की जरूरत ना  पड़े। 
यदि सास- ससुर भी अपनी बहु को बेटी बनाकर रखे,उसे बेटी का  मान दे, प्यार दे ,तो हर घर मैका, और हर बहु, बेटी बन  जाएगी। 






















टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुंदर प्रयास।। लेखन में नियमितता अपने आप परिपक्वता ला देगी, कोशिश करती रहे, शुभकामनायें एवं आशीर्वाद

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

उसकी मदद

EK SABAK

Proud to be a housemaker