उसकी मदद

            

फोन पर-
 राहुल-हां माँ सब ठीक, हां, हां मैंने पासपोर्ट रख लिया है,Image result for TRAIN IMAGE
       हां आज रात की ही फ्लाइट है,
      बस मैं एयरपोर्ट ही निकल रहा हूं ,
     हां ,छुटकी का लैपटॉप भी रख लिया लेकिन ,आप यह बात उसे बताना मत, उसके लिए सरप्राइज है।
 बस करो मां, अब रख दो कल तक पहुंच जाऊंगा आपके पास।
  नहीं मां, सुबह तक नहीं रात तक ही   पहुंचूंगा।
  मुझे लेट हो रहा है मैं रख रहा हूं फोन।

जल्दी-जल्दी अपना सामान जमाते हुए, राहुल तैयारी कर रहा है इंडिया जाने की। 2 साल बाद उसे मौका मिल रहा है, घर पर दिवाली मनाने का और यूं देखो तो 8 साल बाद अपने घर वालों के साथ, सुकून से रहने जा रहा है 1 महीने के लिए। क्योंकि पहले के 6 साल तो पढ़ाई के चक्कर में ही, घर से बाहर निकल गये और इन 2 सालों  से, वो कनाडा में ही जॉब कर रहा है ।अचानक से कुछ याद आया। फोन पर-
राहुल -अरे हां माँ, मैं भूल गया, वो आपके     हाथ की गूंजियाँ , बेसन के लड्डू, पेठे और मठरी जरूर बना कर रखना, बहुत साल हो गए खाए हुए।
पापा और छुटकी को बोलना, पटाखे हम साथ जाकर लाएंगे ,इस बार दिवाली के पूरे मजे लेने हैं।
अब मैं फोन रखता हूं देर हो रही है।

भागते, दौड़ते, राहुल स्टेशन पर पहुंच गया, सामने ट्रेन खड़ी थी। जो सीधे एयरपोर्ट ले जा रही थी, ट्रेन मे चढ़कर अपनी अटैची, लैपटॉप बैग साइड में रखा और आराम से खड़ा हुआ। तभी, उसी के सामने एक महिला भी ट्रेन में चढ़ रही थी, लेकिन उसका पर्स, झटके से बाहर प्लेटफार्म पर गिर गया। राहुल ने उनको रोका और खुद प्लेटफार्म पर उतर कर, वो पर्स उस महिला को दे रहा था, तभी ट्रेन के गेट बंद होने लग गए और वह पर्स उसके हाथ से ट्रेन में छूट गया, लेकिन राहुल स्टेशन पर खड़ा रह गया।
राहुल ट्रेन के पीछे दौड़ा, पर अब कोई फायदा नहीं था। 
राहुल को, कुछ नहीं समझ आ रहा था, कि वह क्या कर सकता है वह जल्दी से दौड़ता -दौड़ता, ऊपर स्टेशन मास्टर के रूम में गया। वहां देखा, तो कोई भी नहीं था ।क्योंकि 9:00 बजे के बाद,  कोई भी स्टेशन पर स्टाफ नहीं रहता। अब राहुल इधर-उधर भागते हुए, हाँफते हुए ,परेशान, उसके पसीने छूट रहे थे। एक कोने में जाकर बैठ गया और सोचने लगा, आज मैंने सब कुछ खो दिया।
कई बार, हमारी जिंदगी में ऐसी कई परिस्थितियों के मोड़ आते हैं, जहाँ हमें लगता है, हमारे हाथ से सब कुछ छूट गया। अब  कुछ भी नहीं हो सकता, जैसे किसी पहाड़ से हमें किसी ने धक्का दे दिया और हम निश्चित ही नीचे जाकर मरेंगे। हम सब कुछ सोच लेते हैं और उस अंधेरे में इतने डूब जाते हैं, कि कोई हल नहीं निकाल पाते ।राहुल  पर भी ऐसा अंधेरा मंडरा रहा था।

अपने मां- पापा और छुटकी का चेहरा, बार-बार आंखों के सामने आ रहा था। सबसे बड़ी टेंशन तो यह थी, कि उस लैपटॉप बैग में पासपोर्ट भी चला गया था। एक बार टिकट तो फोन में भी थी, सामान भी वापस आ सकता था, पर पासपोर्ट का क्या करूंगा। बिना पासपोर्ट के तो इंडिया जाना बिल्कुल भी संभव नहीं है।
          सोचते -सोचते राहुल को याद आने लगे वो चेहरे, जो हॉस्टल में ऑफिस में, सभी जगह उसका मजाक उड़ाते थे।
जैसे वो कह रहे हो -कर ले और मदद, मिल गए लड्डू, तेरा कुछ नहीं हो सकता राहुल, तू पहले भी ऐसा था और आज भी ऐसा ही रहेगा, जिंदगी भर सबको मदद के लिए हाथ ही बढ़ाता रहना, लाइन लग जाएगी यहां। अरे इस दुनिया में जीना है तो श्याणा बन,Be practical, don't be emotional. तेरी तरह और भी तो लोग थे ट्रेन में, कोई क्यों नहीं उतरा उनकी मदद के लिए, तुझे कौन सी चिंगारी लग रही थी।
कितनी मुश्किल से महीने भर की छुट्टी मिली थी, तुझे इस ऑफिस से 2 साल में पहली बार जा रहा था। खुद रोएगा ही,अपनी फैमिली को भी रुलाएगा । सालों से इंतजार कर रही , उस माँ को क्या जवाब देगा ।और तो और अब तो पासपोर्ट भी खो दिया, लग गई बेटा तेरी।
             अब राहुल को गिल्ट होने लगा।
आसमान की ओर देखते हुए-
आखिर क्यों यार,  तुझे कोई बदला ही निकालना था,तो फिर कभी निकाल लेता। मेरी फैमिली ने तेरा क्या बिगाड़ा है, हर साल मैं आऊंगा,यही उम्मीद लगा कर बैठी रहती है मेरी माँ। आज कई साल हो गए मैं  राखी भी नहीं बन्धवा पाया अपनी बहन से, सोचा था, भाई दूज पर उससे राखी भी बन्धवा लूंगा। तूने उनके बारे में भी कुछ नहीं सोचा। 2 साल से इक्कठे करते-करते, मुझे यह 1 महीने की छुट्टी मिली थी।
               सोच लिया मैंने, बस, मैं भी अब इन मदद -वदद के पचड़ो में कभी नहीं पड़ूगां। जैसे सब खड़े होकर देखते हैं, मैं भी देखता रहूंगा। मैं नहीं तो कोई और सही, कोई ना कोई तो मेरी जगह ले ही लेगा, किसी का काम किसी की वजह से रुकता नहीं है। अगर मन नहीं मानेगा, तो मैं मना लूंगा, लेकिन अब किसी भी झंझट में नहीं पड़ूगां।
तभी जेब में पड़े फोन की रिंग बजने लगी बंदा ये बिंदास है, बंदा ये बिंदास है… राहुल जानता था माँ का  ही होगा, उसने नहीं उठाया 1 मिनट बाद फिर से रिंग बजी, राहुल ने सोचा कब तक मां से छुपा लूंगा, जेब मे से फोन निकाला और सीधे कान पर लगा लिया, पीछे से आवाज आई-
 Hello sir,am I talking to Rahul sharma…
राहुल- अरे ,कौन बोल रहा है यार, मुझे कोई इंश्योरेंस नहीं करवानी है।
तभी हिंदी में आवाज आई- सॉरी सर मैं इंडियन एयरलाइंस कि स्टाफ बोल रही हूं, क्या आप राहुल शर्मा बोल रहे हैं।
राहुल- जी ,जी हां ,आप ,आप मेरी टिकट कैंसिल करवा दीजिए। मैडम मेरा पासपोर्ट खो चुका है, इसलिए  मैं आ नहीं पाऊंगा। और अब तो चेकिंन का टाइम भी निकल 
गया, पासपोर्ट मिल भी जाए, तो भी मैं आपके पास नहीं पहुंच पाउंगा। सो, सॉरी फॉर दैट।
स्टाफ- सर, लेकिन आपका बैग, टिकट्स ,पासपोर्ट, सब हमारे पास है और मुझे यह बताने में खुशी हो रही है, कि आपकी टिकट इकोनामी क्लास से बिजनेस क्लास में कर दी गई है। जिन मैडम के पास आपका सामान और लैपटॉप बैग था, उन्होंने ही आपकी टिकट बिजनेस क्लास में करवाई है, इसीलिए आपके पास अभी पूरा टाइम है। आप 1 घंटे के अंदर यहां पहुंच जाइए। मैं पूरी कोशिश करूंगी फ्लाइट को रोकने की।
            राहुल इससे पहले कि कुछ समझ पाता, सामने खड़ी थी लास्ट ट्रेन एयरपोर्ट के लिए। राहुल ने देर नहीं की और बिजली के करंट कि जैसे, अंदर घुस गया। इतनी देर तक भगवान को कोसने वाला राहुल सब समझ गया था।
     राहुल का मन उसे कह रहा था,  अरे, तू जब सबका ध्यान रख सकता है, तो मैं तेरा ध्यान नहीं रखूंगा?
राहुल एयरपोर्ट पहुंचा, स्टाफ से मिलते ही उसने पहला सवाल किया, क्या मैं उस लेडी से मिल सकता हूं? क्या वह अभी एयरपोर्ट पर है ?
सामने से जवाब आया सॉरी सर वो जा चुकीं है।
अब बिल्कुल, वीआईपी ट्रीटमेंट से, इंडियन एयरलाइंस के स्टाफ के साथ, राहुल फ्लाइट में पहुंच गया। दिल में उस महिला के लिए धन्यवाद और ना मिलने का अफसोस करते हुए, वह पहली बार बिजनेस क्लास में जाकर, अपनी सीट पर बैठ गया।
और वह क्या देखता है ,कि सामने से मुस्कुराते हुए वही महिला, उसके पास वाली सीट पर आकर बैठ जाती है। दिल से सम्मान के लिए, राहुल खड़ा हो जाता है, उनके पैर छूने लगता है।
वह महिला हंसते हुए  उसकी पीठ थपथपाते हुए कहती है-you Deserve that, you very good guy, God bless u my son….
                        …..रश्मि..

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