KUDARAT....

Image result for chair book whiteplant"कुदरत"
यह तस्वीर देखकर बताइए,
 क्या लगता है आपको?
 यह कहानी किसकी होगी ?
क्या इस कुर्सी पर बैठे उस शख्स की जो अभी वहां नहीं है?
 या उस कुर्सी पर रखी उस किताब की ?
यह तो आपको कहानी पढ़ने के बाद ही पता चलेगा।
उस दिन बारिश बहुत तेज हो रही थी ।मेरे सामने एक 14 साल का बच्चा उछलता, कूदता, उस बारिश के मजे ले रहा था। मैं बस-स्टैंड पर खड़ी उसको देख रही थी। सामने से, छोटा सा ठेला आ रहा था, जिस पर बहुत सारे पौधे रखे हुए थे। वह बच्चा उछलते -कूदते उस ठेले वाले माली से टकरा गया, क्योंकि  बारिश का टाइम था इसलिए ठेला धीरे -धीरे चल रहा था। उस बच्चे के टकराने की वजह से कुछ पौधे सड़क पर गिर गए ।ठेले वाले माली को बहुत गुस्सा आया।उसने उस बच्चे को दो-चार गालियां दी और जाकर अपने पौधे उठाना लगा। एक नन्हा सा पौधा एक कोने में गिर गया ,पौधे की थैली फट गई थी। उस बच्चे ने उस पौधे को अपने हथेली में बड़े प्यार से उठा लिया। अपनी हथेली में उठाकर, माली के पास लेकर आया और बोला-' काका इसको भी रख लो ।"माली ने उसे दो थप्पड़ जड़ दिये,जोर से गुस्से से ,अपने हाथ से धकेल दिया।
मैं देख रही थी। वह बच्चा एक कोने में बैठा, उसे अपने हाथ में लिए, उससे बातें कर रहा था। 
 मुझे अपनी तरफ आते हुए देख, वो सहम गया और मेरे  पास जाते ही, उसने अपने हाथ, जिसमें वह छोटा सा पौधा था, मेरी तरफ बढ़ा दिये। मुझे कहने लगा-" आपको चाहिए क्या, यह  पौधा ।"मैं हंसने लगी।
 मैंने कहा- नहीं, तुम्हें इतनी जोर से मार पड़ी, तुम्हें रोना नहीं आया?
तो कहने लगा- नहीं, उस टाइम पर मुझे लग रहा था, कि पौधे को कुछ हो ना जाए ,उस की थैली फाड़ दी थी ना मैंने ।बच्चे में एक पौधे के प्रति इतना लगाव, देखकर मुझे बड़ा आश्चर्य  हुआ। मैंने कहा- तुम्हें इससे इतना प्यार क्यों है?
 यह तो तुम्हें अभी- अभी मिला है।
तो कहने लगा -"मेरा एक बहुत बड़ा फ्रेंड है गांव में, बड़ा सारा नीम का पेड़,  जिस पर मैं हमेशा झूला झूलता था ।पर ,जब से मां -बाबा मुझे शहर लेकर आए हैं, मेरे सारे दोस्त ही खो गए। आज मुझे, इस नन्हे से पौधे को देखकर मेरे उस दोस्त की याद आ गई।" 
तो मैंने कहा -चलो, इसे लगा देते हैं तुम्हारे घर में कहीं जमीन पर या किसी गमले में।
 तो कहने लगा -नहीं मैडम मेरे पास तो खुद के रहने की भी छत नहीं है।सड़क के किनारे जो टीने का पत्रा लगा हुआ घर देख रही है ना, उसी में रहता हूं मैं, अपने मां -बाबा के साथ। तुम ही ले जाओ ।मैं कहां लगा पाऊंगा ?
मैंने उसका हाथ पकड़ा, उसे ले गई अपने मां -बाबा के पास। देखा तो छोटे से टीन शेड के घर में, उसकी मां रोटी बना रही थी। मैंने कहा क्या करती हो तुम? तो कहने लगी- क्या हुआ मैडम जी इसने कोई शैतानी की है क्या? 
 गांव से आई हूं मैडम जी,5 दिन हुए हैं,कोई काम ढूंढ रही हूं पर काम नहीं मिल रहा। मेरा पति रोज जाता है रोज की मजदूरी लेकर आता है। गांव में कोई साधन नहीं था,रोजी- रोटी का तो शहर आना पड़ा। इसका स्कूल भी छूट गया।
उसका गांव वाला, सीधा पन और भोलापन देखकर।
मैंने कहा -चलो मेरे साथ, पास ही में मेरा घर है। मेरे यहां काम करोगी? इससे पहले कि वह सोचती और जवाब देती, मैं उसे अपने साथ ले आई, अपने घर । मैंने बड़े प्यार से उस लड़के से, एक गमले में उस  नन्हे से पौधे को लगवाया और कहा -देखो, अब तुम्हारा यह दोस्त हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा। तुम हमेशा अपनी मां के साथ आना और इससे मिलकर जाना। 
आई तो, वो मेरे घर पर  एक मामूली सी कामवाली बनकर थी। पर आज  7 साल बाद, वह मेरे घर की पूरी मैनेजर है। और वह 14 साल का लड़का, मेरा 21 साल का बेटा चेतन बन गया है। मां से भी ज्यादा प्यार देता है मुझे ।उसने मेरे और मेरे पति के जीवन के सुनेपन को भर दिया। वर्षों तक हम एक औलाद को तरसते रहे । एक छोटे से पौधे ने मुझे,  एक भरा पूरा परिवार दे दिया। अब तो आप समझ गए होंगे ना, कि उस पौधे का मेरे जीवन में कितना खास स्थान है। उसका नाम भी रखा है मैंने, "चैतन्य" जिसने मेरी जड़ जैसी जिंदगी में, चेतना भर दी।
      तो आप देख रहे हैं न , सफेद गमले में इतराता  हुआ, चैतन्य। आज भी दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करते हैं। 
सच आप कुदरत को जितना देते हो, कुदरत उससे कहीं ज्यादा आपको लौटाती है।

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