क्या आपने भी कभी सोचा???
कल मेरे घर कुछ सखियों का डीनर था। सबकी जीभ पर स्वाद ठहर गया जो तारीफ़ पे तारीफ़ बनकर निकल रहा था। मैं आंनद ले रही थी इस पल का, संतोष था कि सबने आराम से भोजन किया। अचानक बातें चल पड़ी आज के टीवी सीरियल्स और सीरीज की तब मन में कई सवाल उथल-पुथल मचाने लगे अक्सर यह डेली सोप सीरियल्स महिलाओं को केंद्र में रखकर ही बनाए जाते हैं। नारी जो डाइनिंग टेबल पर थाली सजाने से पहले उसमें पौष्टिक तत्व और स्वाद का पूरा ध्यान रखती है। पर बहुत अफ़सोस होता है जब उसके लिए कुछ अच्छा बनाकर परोसने की बारी आती है तो उसे डस्टबीन समझ लिया जाता है। ये डेली सॉप वाले चैनल्स एक ही स्टोरी को कई सालो तक तड़का लगा -लगा कर परोसते रहते है। इन सीरियल्स में नारी की हालत तो इतनी बेचारी और इतनी चरित्रहीन दिखाई जाती है जैसे समाज में उस पर ही सारे अत्याचार हो रहे हैं और वही सब पर अत्याचार कर रही है। किसी से प्यार तो किसी से शादी!!! लोग मर- मर कर जिन्दा हो जाते है!!...