क्या आपने भी कभी सोचा???


कल मेरे घर कुछ सखियों का डीनर था। सबकी  जीभ पर स्वाद ठहर गया जो तारीफ़ पे तारीफ़ बनकर निकल रहा था। मैं आंनद ले रही थी इस पल का, संतोष था कि सबने आराम से भोजन किया। अचानक बातें चल पड़ी आज के टीवी सीरियल्स और सीरीज की तब मन में कई सवाल उथल-पुथल मचाने लगे अक्सर यह डेली सोप सीरियल्स महिलाओं को केंद्र में रखकर ही बनाए जाते हैं। नारी जो डाइनिंग टेबल पर थाली सजाने से पहले उसमें पौष्टिक तत्व और स्वाद का पूरा ध्यान रखती है। 
                                            पर बहुत अफ़सोस होता है जब उसके लिए कुछ अच्छा बनाकर परोसने की बारी आती है तो उसे डस्टबीन समझ लिया जाता है। ये डेली सॉप वाले चैनल्स एक ही स्टोरी को कई सालो तक तड़का लगा -लगा कर परोसते रहते है। इन सीरियल्स में नारी की हालत तो इतनी बेचारी और इतनी चरित्रहीन दिखाई जाती है जैसे समाज में उस पर ही सारे अत्याचार हो रहे हैं और वही सब पर अत्याचार कर रही है। किसी से प्यार तो किसी से शादी!!!  लोग मर- मर कर जिन्दा हो जाते है!!! एक का काला जादू सभी सीरियल पर छा जाता है!!!! रिश्ते तो बस बिगड़ने के लिए ही बनते है!!! 
यह हम सभी के लिए सोचने वाली बात है, क्या सच में भारतीय समाज ऐसा है ????                                                                       शुरुआत तो बहुत अच्छी होती है फिर धीरे - धीरे नैतिक आदर्श ही गायब हो जाते है। लेखक, निर्देशक सभी भूल जाते है की स्टोरी क्यों बनायीं है??? भारत में परिवारों के हर एक रिश्ते की मान - मर्यादा उनके आत्मिक संबंधों की धज्जियां उड़ा कर रख देते हैं.... बस कैसे भी करके चैनल पर अपनी ट्रैन दौड़ाते  हैं ।टी आर पी के नाम पर स्टोरी को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत करते है। यहाँ तक की इतिहास पर आधारित कहानियों को भी नहीं छोड़ते।                                                                                                                                    
            हर घर में माँ ,बेटी,नानी,दादी,पत्नी किसी न किसी रूप में गृहणियां जो अपना मनोरंजन इन्ही सीरियल और चैनल्स को देखकर ही करती है जरा सोचिए इस नए दौर में आखिर हम क्या दे रहे हैं??? हमारी नई पीढ़ी को... । मीडिया एक ऐसा माध्यम है जो बहुत तेजी से मानसिकता बदलता है और सही या गलत किसी भी प्रकार की धारणाओं को हमारे दिमाग पर सेट कर देता है और हम भूल जाते हैं की हमारा यही वर्तमान हमारा भविष्य बना रहा है। 
दर्शक बेवकूफ नहीं है, लेखन, निर्देशन की हर कमी आराम से पहचान लेते है। पर फिर भी नजरअंदाज करते है तो इसका मतलब ये नहीं कि बेस्वाद ,बासी ,नॉनसेंन्स स्टोरीज आप डस्टबीन समझ कर  डालते जाये। 
मीडिया को चटपटा और मसालेदार नहीं जिम्मेदार बनाएं।
दर्शक होने के नाते क्यों ना, एक कदम हम भी उठाएं... 
संपूर्ण विश्व में भारत ऐसा देश है जहां आज भी एक रसोई से अनेक रिश्तो की महक एक साथ आती है मान, मर्यादा  और जिम्मेदारियां निभाई जाती है। 
यह संस्कार, ये परंपराएं, हमारी धरोहर अपनी नई पीढ़ी तक पहुंचाते हैं, हमारे बच्चे, हमारे साथ या अकेले आखिर क्या देख रहे हैं??? इस बात पर गौर फरमाते है, नकारात्मक सीरियल हो या अश्लील सीरीज अपने घर से इन तत्वों को दूर हटाते है। 
राष्ट्रभक्ति की ओर एक कदम बढ़ाकर अपने देश के प्रति जिम्मेदारी निभाते हैं।
                    रश्मि दाधीच ✍️

टिप्पणियाँ

  1. A really good thought. Aakhir kyun hamare pass healthy diet ki tarah healthy entertainment ka option nahi hota.

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  2. Bilkul sahi hai. Aakhir kyun hame gala shada dekhana padta hai.

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  3. Right! By showing some kind of revenge every serial director thinks that they had done a greatjob. But it is like serving u same sabji and roti daily,which after some time you'll stop eating. So live fresh give fresh.

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  4. Likhna hat kisi k bas ki baat nai..Bahut soch samajh k likhna padhta hai....Aur likha bhi aisa hai k pura padhna...aur lagatar hi padhne ka mann ho.....Bahut accha and I really appreciate

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