Proud to be a housemaker

          नारी 

               मैं   जननी जन- जन में बसती , 

 आधार सृष्टि सबकी शक्ति ,     

  वात्सल्य, प्रेम की मूरत हूँ ,

हर  घर में ज्योत मेरी जगती।  

                        



भारतीय समाज में नारी की जगह वही होती है जो मानव शरीर में आत्मा की होती है ,जो सम्पूर्ण कार्य के संचालन का केंद्र होती है। 

नारी -जो मकान को घर बनाती है ,घर में परिवार बसाती है ,परिवार में रिश्ते- नातों के फूल लगाती है ,इन्ही रिश्तो की अनूठी परम्परओं को ,हमारे संस्कारों को ,संस्कृति को, एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाती है। घर परिवार की छोटी- बड़ी सभी जिम्मेदारियों को निभाते हुए, अपने घर में ऐसा वातावरण तैयार करती ताकि सभी सदस्य अपने सपनों को सच कर सके। परिवार में निरन्तर आशा की लौ जलाती है ,प्रेरित करती है की उन्हें मंजिल मिले  और वे समाज में गर्व के साथ अपना योगदान कर सके।  इतना सब कुछ करने के पीछे उसका स्वयं का कोई स्वार्थ नहीं होता। सबकी प्रशंसा,प्यार बड़ो का आशीर्वाद यही उसकी ख़ुशी होती है।


ज़रा सोचिये -वही नारी स्वयं को HOUSEWIFE,HOUSEMAKER,गृहणी या गृहस्वामिनी कुछ भी कहने से क्यों झिझकती हैं? हम स्वयं को ही सम्मान क्यों नहीं दे पाते ?हमारी माँ ,नानी, दादी इन सभी के योगदान को इतना छोटा कैसे कर  सकते है ?हमें अपनी ही हीनभावना से निकल कर स्वयं को समाज में सम्मान देना होगा। हमें गर्व से कहना चाहिए की हम गृहणी हैं।


ये बहुत ही सराहनीय है की आज उसी गृहणी ने घर के बाहर निकल कर भी अपने पैर जमा लिए है। अपने लिए नया आसमान तैयार कर लिया है। फिर चाहे वो किसी कम्पनी की CEO हो या किसी पार्टी की नेता ,वो सिंगल हो या शादीशुदा सभी सबसे पहले एक गृहणी ही  है। इसलिए आप जो कार्य कर रही है वो आसान नहीं है। उस कार्य को छोटा  मत समझिये और ना ही किसी को  समझने दीजिए। आपका इस समाज में ,भारतीय संस्कृति में बहुत बड़ा योगदान है। गर्व से कहिये हम एक हाउसमेकर  है। 








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