KISI KA PAHNAVA USKE VYKTITVA KI PAHCHAN NAHI HOTA

                                  मिट्टी की खुशबू 

 माँ, मुम्बई से  मेरी सहेली दीप्ती  की बेटी आज यहाँ आ रही है। ये देखिये, व्हॉट्सअप पर उसकी फोटो आयी है। बनारस पर  फोटो शूट करने आ रही है दो- तीन दिन के लिए।
माँ फोटो देखते हुए बोली -आजकल के बच्चे कितनी तेजी से मॉर्डन होते जा रहे है,और कपडे,छोटे होते जा रहे हैं। पहनावा ,बोल-चाल ,रहन-सहन सभी कुछ पाश्चात्य सभ्यता में ही रंगा हुआ है।
मैं बोली- माँ हमारी संस्कृति तो प्रारम्भ से ही इतने खुले विचारों की है। हमने सभी बदलावों को सहर्ष स्वीकार किया है।  किसी के पहनावे से क्या फर्क पड़ता है यदि उसके विचारों में,संस्कारों में,उसके व्यवहार में ,हमारी संस्कृति की झलक हो ,हमारी मिट्टी की खुशबु हो।

तभी डोर बेल बजी,, दरवाजा खोला, तो मेरे सामने थी ,एक खूबसूरत लड़की पैरों में बूट ,जीन्स,शॉर्ट शर्ट,गले में स्कार्फ़ ,साथ में गिटार और हाथों में कैमरा लेकर मेरी फोटो खींच रही थी। एक पल को तो मैं  समझ ही नहीं पायी, की ये कोन  है?  तभी आवाज आयी------ smile आंटी। अरे रुही ,क्या बात है आते ही. . . . . . . . शुरू।
रुही ने झुक कर प्रणाम किया, और गले लग गई,उसका प्यार बहुत अपना सा लग रहा था। आओ तुम्हे माँ से मिलवाती हूं। माँ को भी, उसने  स्नेह से झुक कर प्रणाम किया, मुझे बहुत अच्छा लगा।
हम तीनो ने बाते की, फिर मैं उसे उसके कमरे में ले गयी। अब तुम फ्रेश हो जाओ, मैं लंच लगाती हूँ, कह कर मैं जैसे ही बाहर आयी तो देखा की ,माला माँ से कहती है -अम्मा जी ये शहरी मैडम कोन है ? गली में सब इनकी ही बात कर रहे थे। इनके रंग- ढंग तो. . . . . . . . . . . .
मैं बोली -  खबरदार माला किसी को बिना जाने, उसके लिए कुछ भी उल्टा- सीधा नहीं बोलना चाहिये। जाओ  जाकर अपना काम करो।
 माँ ने कहा -तूने उसको तो चुप कर दिया, पर लोगो का क्या ?हम इसी समाज में रहते हैं, सबको नजरअंदाज तो नहीं कर सकते। इसीलिए ये कहावत बनी है ---जैसा देश वैसा भेश।
माँ, मैं आपको गलत नहीं कहती, परन्तु हमें अपनी सोच बदलनी होगी ,और इसकी शुरुआत हर घर से ही होगी। हर दौर में एक नया ट्रेंड आता है, नया फैशन आता है ,और नयी पीढ़ी ही उसे आगे लेकर जाती है ,ट्रेंड बदलते रहते है ,फैशन भी बदलता रहता है, बस,-हमारी पहचान, हमारी जड़े नहीं बदलनी चाहिए। हमारे विचार  संकीर्ण  नहीं व्यापक होने चाहिए।
आंटी बहुत जोर से भूख  लगी है... . . . . . . . .हम तीनो  ने लंच किया और रुही अपने प्रोजेक्ट के लिए बाहर निकल गयी। शाम को जब माँ आरती कर रही थी, तो माँ के सुरों के साथ रुही के सुर भी मिल गए। माँ को ऎसी आशा नहीं थी। अब तक माँ उसके साथ सहज नहीं थी, पर अब कुछ बदल रहा था। आरती के बाद रुही ने माँ को गिटार पर गीता के श्लोक भी सुनाये। ऐसा लग रहा था जैसे रुही को पता है, की माँ उसके साथ  सहज नहीं है,और वो उन्हें खुश करने की पूरी कोशिश कर रही है।
 तभी माँ ने बोला- कल मेरे साथ मंदिर चलोगी  ? बहुत ही सुन्दर शिव जी का मंदिर है।  तुम वहां की फोटो भी ले लेना।रूही ने जवाब दिया ----हां दादी माँ जरूर  चलूँगी।
सुबह सुबह माँ पूजा की टोकरी लेकर तैयार थी। पर रूही नहीं दिखी, माँ ने कहा -अरे बार्बी डॉल अभी तक सो रही हो क्या?  बाहर से आवाज आयी- मैं  यहाँ हूँ दादी माँ, मैं तो तैयार हूँ, सनराइज की फोटो  लेने गयी थी।
लो चलो फिर मन्दिर। . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .
मंदिर में माँ को सभी जानते थे, पर आज एक नया चेहरा साथ में था। रूही को देख कर मंदिर की औरते खुसफुसाने लग गयी ,एक ने माँ से कहा -अम्मा जी आपकी पोती तो बहुत सुन्दर है, पर कपडे थोड़े छोटे पहन रखे है। . . . . . . . . .(आज रूही ने मिनी स्कर्ट जो पहना था।  )
माँ ने उनकी बात को नजरअंदाज करते हुए रूही को कहा -बेटा शिव महिम्न शुरू करें।
दोनों ने शिव स्तुति से मंदिर में एक सकारात्मक ऊर्जा को प्रवाहित कर दिया। अब कई भजन और स्तुति की मंदिर में झड़ी लग गयी थी। जो लोग रूही के लिए तरह- तरह की बाते कर रहे थे। वे अब प्रशंसा करते नहीं थक रहे थे। पंडित जी ने कहा -अम्माजी आपकी पोती तो बहुत ही संस्कारी है, बहुत सुन्दर स्तुति गायी है।
माँ और रूही मंदिर की सीढ़ियों से निचे उतर रहे थे. तभी, माँ को कुछ सूट पहने लड़कियां पूजा की थाली हाथ में लेकर आते हुए दिखी। माँ ने तुरंत रूही को कहा -बेटा कल आप मेरे साथ ऐसा  सूट पहन कर आना।
रूही समझ रही थी, उसने माँ को कहा -जी दादी माँ जरूर, हम आज ही मार्केट जायेंगे। दादी माँ आप चलिए मैं एक फोटो खींच कर आती हूँ।
माँ आगे बढ़ रही थी कि , नीचे गिरे फूल से माँ का पैर फिसला ,माँ को तो रूही ने संभाल  लिया पर वो पूजा की टोकरी उन लड़कियों पर जा गिरी।रोली, चावल,गंगाजल ,उनके कपड़ो पर बिखर गए।
वो चिल्लायीं -ओह माई गॉड,,, पूरा ड्रेस ही खराब कर दिया। ,एक बोली-अरे अम्माजी,थोड़ा देख कर तो चलना था। दूसरी बोली- छोड़ो यार , तुम भी किससे माथा लगा रही हो?ड्रेस तो खराब हो ही गयी है।
माँ उन्हें देख कर बिल्कुल दंग रह गयी, माँ को जहां से फूलों की आशा थी वहां से कांटे बरस रहे थे।
रूही को बहुत गुस्सा आया वो बोली -क्या आप लोगो को इतने भी मैनर्स नहीं है की बड़े लोगो से कैसे बात करते है ?यहाँ दादी माँ गिरते- गिरते बच गयी, और आप लोगों को अपने कपडों की पड़ी है ,ये पूजा की सामग्री ही तो थी कोई गंदगी नहीं।
उनमे से एक ने कहा -तुम पहले  खुद को देखो, मंदिर- वो भी ऐसे ,तुम हमें पूजा के बारे में क्या सिखा  रही हो ?
माँ ने चुप्पी तोड़ी और बोला -अरे इसका तो बाहरी आवरण बदल जाएगा। पर तुम्हारी  मानसिकता पर जो पत्थर पड़े है, उनको कोन  हटाएगा। तुम्हरी सोच, तुम्हारे संस्कार, पर जो अहंकार का परदा गिरा है, उसे हटाओ और गौर से देखो ये तुमसे लाख गुना बेहतर है। मुझे गर्व है, कि  ये मेरी पोती है, इसमें मेरे देश की संस्कृति की ,मिट्टी की खुशबु है।
दोनों हँसते हुए घर पहुँची और मुझे पूरी कहानी बतायी। रूही ने माँ से कहा -दादी माँ मैं आपकी एक बात का ध्यान रखूँगी  . . . . . ".जैसा देश वैसा भेश  ".
माँ ने कहा -मैंने भी तुमसे सीखा, कि  पहनावा किसी के व्यक्तित्व का परिचायक नहीं होता। और दोनों हँसने लगे

हमें हमारे बच्चों को उड़ने के लिए एक खुला और स्वतन्त्र  आसमान देना चाहिए। बस उनकी जड़ों में हमारे देश की संस्कृति और मिट्टी की खुशबु होनी चाहिए। ये हमारे देश के प्रति,  हमारी जिम्मेदारी है। 



























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