EK SABAK
कभी कभी जीवन का सबक सीखने के लिए एक छोटा सा पल भी काफी होता है। जीवन ,रेत की तरह
हाथ से फिसलता चला जाता है, और हम बस अपने भविष्य की कल्पनाओं में ही जुटे रहते है। हमें
आज,अभी ,और इसी पल में ही जीना सीखना चाहिये।
घर की मुंडेर पर जमीं हुई, मैं सोच रही थी बैठी- बैठी ,
नीचे हा- हा कार मचा क्यों ,मैं अर्थी पर क्यों हूँ लेटी।
नीचे जाकर खूब जगाया,
खुद ने खुद को खूब उठाया।
तभी पधारे यम अंकल जी, करने मुझसे भेंट ,
चलो वत्स ,अब बहुत हो गया ,यू आर गेटिंग लेट।
मैं झल्लायी ,चिल्लाई बोली ये कैसा है इन्साफ ?
वार्निंग तो देनी थी पहले ,कैसे कर दिया मुझको साफ़ ?
अब तक मैंने किया ही क्या है ?
जी भर के कुछ जिया ही क्या है ?
अच्छे पल के इन्तजार में ,तकती रास्ता आँख बिछाये ,
मंजिल का तो पता नहीं, पर तुम क्यूँ बीच में लेने आये ?
यम अंकल जी हंस कर बोले, रोज मैं सुनता यही कहानी ,
जीते जी तुम समझ ना पाए ,मर कर सब बनते हो ज्ञानी।
सदियों से तुम पढ़ते आये लिखते ,रटते,जपते,आये,
हर पल जी भर जीना सीखो ,नित-नित जीवन घटता जाए।
गुड मॉर्निंग ओ मम्मा प्यारी, क्या- क्या आज बनाओगी ,
हफ्ते भर से टाल रही हो, वादे सभी निभाओगी।
आँख खुली तो फूल से चेहरों के पहरो में ,मेरी काया ,
बुरा कहूँ या अच्छा सपना, जिसने मुझको आज जगाया।
छोटे से क्षण में जीवन के सार को मैंने जान लिया है ,
आज, अभी, और इसी ही पल से जीना है ये मान लिया है ,
आज अभी ,और इसी ही पल से जीना है ये मान लिया है।
घर की मुंडेर पर जमीं हुई, मैं सोच रही थी बैठी- बैठी ,
नीचे हा- हा कार मचा क्यों ,मैं अर्थी पर क्यों हूँ लेटी।
नीचे जाकर खूब जगाया,
खुद ने खुद को खूब उठाया।
तभी पधारे यम अंकल जी, करने मुझसे भेंट ,
चलो वत्स ,अब बहुत हो गया ,यू आर गेटिंग लेट।
मैं झल्लायी ,चिल्लाई बोली ये कैसा है इन्साफ ?
वार्निंग तो देनी थी पहले ,कैसे कर दिया मुझको साफ़ ?
अब तक मैंने किया ही क्या है ?
जी भर के कुछ जिया ही क्या है ?
अच्छे पल के इन्तजार में ,तकती रास्ता आँख बिछाये ,
मंजिल का तो पता नहीं, पर तुम क्यूँ बीच में लेने आये ?
यम अंकल जी हंस कर बोले, रोज मैं सुनता यही कहानी ,
जीते जी तुम समझ ना पाए ,मर कर सब बनते हो ज्ञानी।
सदियों से तुम पढ़ते आये लिखते ,रटते,जपते,आये,
हर पल जी भर जीना सीखो ,नित-नित जीवन घटता जाए।
गुड मॉर्निंग ओ मम्मा प्यारी, क्या- क्या आज बनाओगी ,
हफ्ते भर से टाल रही हो, वादे सभी निभाओगी।
आँख खुली तो फूल से चेहरों के पहरो में ,मेरी काया ,
बुरा कहूँ या अच्छा सपना, जिसने मुझको आज जगाया।
छोटे से क्षण में जीवन के सार को मैंने जान लिया है ,
आज, अभी, और इसी ही पल से जीना है ये मान लिया है ,
आज अभी ,और इसी ही पल से जीना है ये मान लिया है।

Mast hai.
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