अपने सपनों में रंग भरो

 


रागिनी बेड रूम में राकेश से बातें करते हुए- ओहो! 9 बज गए हैं! मैं जल्दी करती हूं| अभी तो झाड़ू पोछा भी करना है, बर्तन भी करने हैं| सभी लोग नाश्ते का वेट कर रहे होंगे?


(कहते-कहते जैसे ही रागिनी कमरे से बाहर निकली तो देखा कि आदि और पीहू पूरे घर की साफ-सफाई कर रहे हैं)


रागिनी- आज तो इतना बड़ा सरप्राइज! (खुश होकर) क्या बात है मेरे बच्चों? चलो तुम्हें भूख लग गई होगी, मैं जल्दी से नाश्ता बना देती हूं।


(किचन में) अरे अम्मा!!! यहां क्या कर रहे हो??? 


अम्मा- सरप्राइज़ नाश्ता तैयार है, चलो डाइनिंग टेबल पर…. 


रागिनी को तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था यह सब हो क्या रहा है??? 


सभी ने एक साथ बैठकर नाश्ता किया और नाश्ता करते ही बच्चों ने कहा-


चलो मम्मी आंखें बंद करो आपके लिए एक और सरप्राइज़ है….. 


आंखें बंद करके रागिनी को ड्राइंग रूम में लेकर गये। जब आंख खुली तो रागिनी ने देखा सालों से उसकी अलमारी में बंद पड़े कैनवास कलर्स ब्रशस सभी कुछ आज ड्राइंग रूम में सजे हुए थे|


रागिनी 2 मिनट के लिए ठहर गई, उसकी आंखें राकेश को ढूंढने लगी। क्योंकि राकेश को ही पता था की रागिनी कॉलेज टाइम की बहुत बड़ी आर्टिस्ट थी। उसने पेंटिंग्स में कई प्राइज जीते हैं लेकिन शादी के बाद उसने ये बात किसी को नहीं बताई और राकेश को भी मना कर दिया था। फिर धीरे-धीरे अपने घर के कैनवस में रंग भरने में इतनी व्यस्त हो गई, कि उसे कभी अपने रंग और अपने कैनवस की याद ही नहीं आई।


राकेश उसे देख कर मुस्कुराने लगा और कहने लगा - यह मेरा नहीं बाबूजी का आईडिया था।  बाबूजी हंसते हुए - हां भाई, रागिनी बेटा, तुम मेरा घर में सबसे ज्यादा ध्यान रखती हो और मेरा ही नहीं पूरे घर का पूरा ध्यान रखती हो। 


तो फिर हमारा भी तो कुछ फर्ज बनता है। कल जब मैं स्टोर में अपनी किताब ढूंढ रहा था तो एक कागज के डब्बे में तुम्हारे कुछ छोटे-छोटे कैनवस मुझे मिल गए, तुम तो बहुत ही सुंदर चित्रकार हो! तुम्हें अपनी कला को यूं ही नहीं छोड़ना चाहिए| अब तो बच्चे भी बड़े हो चुके हैं, एक घंटा ही सही, पर खुद की कला को, खुद की अभिव्यक्ति को समय जरूर दो।


अम्मा- यह हुई ना बात, कला तो भगवान की देन है, इसे छुपाना नहीं सबको दिखाना चाहिए| तुम्हारी पेंटिंग देखकर मुझे पता चल चुका है, तुम तो पोर्ट्रेट बहुत अच्छे बनाती हो| तुम मेरा कब बनाने वाली हो?


रागिनी की अभिव्यक्ति आंखों से निकल रही थी| उसका मन बहुत खुश था और खुश होकर कह रही थी "क्यों नहीं अम्मा, आपके साथ-साथ पूरे परिवार का पोट्रेट बनाऊंगी और इसी ड्राइंग रूम में लगाऊंगी| इतनी खूबसूरत फैमिली भला किसको मिलती है?"


राकेश- तो फिर आपकी पेंटिंग्स की प्रदर्शनी के लिए हॉल बुक कर लिया जाए? अब तो सही समय आ गया है अपने सपनों में रंग भरने का|


रश्मि दाधीच



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